शहरवासियों ने पुराने भोपाल में दी कारगिल युद्ध में हुए शहीदों को श्रद्धांजलि।

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आज कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में भोपाल के शहरवासियों ने बाबे अली खेल मैदान के निकट बने भव्य भोपाल गेट (शहीद स्मारक) पर इकट्ठा होकर लंबे समय से यूँही अव्यवस्थित पड़े शहीद स्मारक की साफ सफाई की और पुष्प अर्पित किए। सभी को जहाँ कारगिल युद्ध मे भारत की विजय पर गर्व की अनुभूति हो रही थी वहीं बड़ी तादाद में इस युद्ध मे देश के सम्मान के लिए शहीद हुए सिपाहियों के बलिदान को भी याद किया गया। कारगिल युद्ध को आज 20 साल हो गए और आज भी सभी भारतीयों को वो दिन याद है जब वायुसेना नर 32000 फीट की ऊँचाई से सूझ बूझ का इस्तेमाल कर बमबारी करके दुश्मन सेना को धूल चटाई थी। भारत युद्धों के इतिहास में कारगिल युद्ध इसीलिये भी खास हो जाता है क्योंकि ये सैन्य, राजनैतिक और कूटनीतिक जीत जा मिश्रण था। शहीदों की इस श्रद्धांजलि के मौके पर पुराने भोपाल के शहरवासियों के साथ ही मध्य विधानसभा के विधायक श्री आरिफ मसूद ने भी पुष्प अर्पित कर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और सभी में मौन रख वीरसपूतों के बलिदान का स्मरण किया।

इस कार्यक्रम के संयोजक अनस अली ने कहा कि शहीदों की याद में जितना कुछ किया जाए कम है ऐसे में भारत के नागरिक होने के नाते हम सबको देश के सपूतों के बलिदान की कद्र करनी चाहिए और उनसे प्रेरणा लेकर देश हित मे अपना योगदान देना चाहिये।

वहीं इस श्रद्धांजलि में शामिल एमएससी मिलिट्री साइंस की विद्यार्थी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अस्मा खान का कहना था कि एक सीमित पारंपरिक युद्ध के रूप में कारगिल संघर्ष ने भारत के रक्षा सिद्धांत को काफी प्रभावित किया। कारगिल युद्ध के बाद यह स्पष्ट हो गया कि परमाणु युद्ध के अलावा भी युद्ध की गुंजाइश है। हम एक ऑल आउट वॉर के लिए नहीं जा सकते थे, मगर एक सीमित परमाणु रहित युद्ध संभव था। निश्चित रूप से भारत अब 1999 की तुलना में और भी बेहतर तैयार हो गया है।

शहरवासी अनवर पठान का कहना था कि हर साल वे कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को किसी ना किसी रूप में श्रद्धांजलि देते हैं और हर बार उनकी आँखों में उन शहीदों के बलिदान का स्मरण का कर एक नई चमक आती है जो उन्हें देश और समाज हित के लिये कुछ करने के लिए प्रेरित करती है।

-विकाश तिवारी-