पहले थैलेसीमिया का ज्ञान फिर शादी और संतान..

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दिनों दिन हमारे मध्यप्रदेश में रक्त की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, डिलीवरी के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों को ब्लड चढ़ना, कैंसर पीड़ितों के लिए रक्त की ज़रूरत, डायलिसिस, एनेमिया, आदि। इन सबसे ऊपर है थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को पड़ने वाली रक्त आवश्यकता, इन्हें हर 15 दिन में ब्लड चढ़ता है और जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं तो हर हफ्ते उनके शरीर को रक्त की ज़रूरत होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार स्वेच्छिक रक्तदान से इकट्ठे किये गए ब्लड में से 40 प्रतिशत ब्लड थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। क्या हो यदि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का जन्म ही ना हो? जी हाँ ऐसा मुमकिन है, यदि आज का युवा जागरुक हो जाये और अपनी शादी के पूर्व खुदकी और अपने होने वाले पार्टनर की माइनर थैलेसीमिया (HBA2) की जाँच करा ले तो वे भविष्य में अपनी संतानों को मेजर थैलेसीमिया जैसे भयानक और दर्दनाक मर्ज़ से बचा सकते हैं।

माइनर थैलेसीमिया एक मामूली सी रक्त जाँच है जिससे ये पता लगाया जा सकता है कि शरीर मे मौजूद रक्त में कौनसा केरियर है। इन्हीं बातों को जन-जन तक पहुँचाने और भोपाल वासियों को आसानी से इस जाँच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यूथ ब्रिगेड टीम भोपाल द्वारा एमपी ब्लड ट्रांसफ़्युज़न एन्ड सेवा सोसाइटी और सिमपथी फाउंडेशन के सहियोग से शहर के तत्पर ब्लड बैंक में मुम्बई (महाराष्ट्र) से थायरोकेयर की टीम बुलाई गई जिसमें मुम्बई के सामाजिक कार्यकर्ता थादाराम तोलानी का अमूल्य सहियोग रहा। इस माइनर थैलेसीमिया जाँच शिविर में शहर के कई लोगों ने जाँच कराई और थैलेसीमिया जन जागरुकता में सहभागिता का संकल्प लिया।

इस शिविर के मुख्य अतिथि थादाराम तोलानी ने बताया कि ये जाँच अमूमन 1000 से 1200 के बीच की जाती है परंतु हम देश भर में अपनी संस्था के सहियोग से इस जाँच को प्रति व्यक्ति ₹150 रुपये में करते हैं, अभी तक देश भर में लगभग 1.5 लाख लोगों का माइनर स्टैट्स हम चेक कर चुके हैं। यदि इस तरह के शिविर करने की ज़िम्मेदारी हर प्रदेश में कोई न कोई ले ले तो थैलेसीमिया से ये जंग हम बहुत जल्द जीत जाएंगे।
इस शिविर की आयोजक एवं यूथ ब्रिगेड की फाउंडर अस्मा खान ने बताया कि ये शिविर भोपाल जैसे शहर में जो कि मध्यप्रदेश की राजधानी भी है सफलतापूर्वक कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि लोग इस बीमारी को पढ़े लिखे होने के बाद भी जानना समझना ही नहीं चाहते। कोई भी नहीं चाहेगा कि उनकी संतान को जन्म लेने के बाद से दूध की बोतल की जगह खून की बोतल पीनी पड़े। माइनर थैलेसीमिया कोई बीमारी नहीं है और ये किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को हो सकता है परन्तु यदि दो माइनर थेलेसिमिक साथी आपस मे शादी कर लेते हैं तो भविष्य में उनकी संतान को 25% मेजर थेलेसिमिक होने की संभावना बनी रहती है जो कि बहुत ही दर्दनाक है। हमारा उद्देश्य थैलेसीमिया मुक्त मध्यप्रदेश बनाना है ताकि हर बच्चा हर परिवार खुशहाल जीवन बिता सके।